ऊर्जा-सुरक्षा राष्ट्रस्य बलं, आत्मनिर्भरता भवति ध्येयम्।
वैश्विक संकट के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बनकर सामने आई है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर किसी भी देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें लगभग 87–88% कच्चा तेल और लगभग 56% प्राकृतिक गैस शामिल है। इसके अलावा एलपीजी और यूरेनियम के लिए भी भारत बाहरी स्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में पश्चिम एशिया में उत्पन्न तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया, विशेष रूप से स्टेट ऑफ हार्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर असर पड़ा, जहां से भारत को बड़ी मात्रा में तेल और गैस प्राप्त होती है।
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। सबसे महत्वपूर्ण रणनीति रही है ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, जिसके तहत पहले जहां भारत 10–12 देशों से तेल आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 42 देशों तक पहुंच गई है। संकट के समय भारत ने अमेरिका, नॉर्वे, मेक्सिको और अल्जीरिया जैसे देशों से एलएनजी आयात बढ़ाकर आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा। साथ ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य ईंधनों की आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी और यह सुनिश्चित किया कि आम उपभोक्ता, विशेषकर गरीब वर्ग, पर कीमतों का अधिक बोझ न पड़े।
भारत ने अन्य देशों की तुलना में ऊर्जा संकट को बेहतर तरीके से संभाला है। जहां अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 35–50% तक वृद्धि हुई, वहीं भारत में कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया। इसके साथ ही एलपीजी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप 2014 के 14 करोड़ कनेक्शनों से बढ़कर आज 34 करोड़ से अधिक कनेक्शन हो चुके हैं। इसके अलावा पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम हो और अधिक लोगों को सुविधाजनक और स्वच्छ ईंधन मिल सके।
ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का दृष्टिकोण संतुलित है, जिसमें पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों स्रोतों को महत्व दिया जा रहा है। वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था लगभग 80% फॉसिल फ्यूल पर आधारित है, और भारत में भी कोयला एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत बना हुआ है, जो देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसके साथ ही भारत ने सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, न्यूक्लियर एनर्जी और अन्य उन्नत तकनीकों पर भी सरकार का विशेष ध्यान है।
भविष्य को देखते हुए भारत ने 2047 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। हालांकि बढ़ती आबादी, बढ़ती ऊर्जा मांग और ऊर्जा गरीबी जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन सरकार की नीतियां, तकनीकी प्रगति और विविध ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के माध्यम से भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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